आसपुर देवसरा। सरकारें विकास के बड़े-बड़े दावे करती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अक्सर इन दावों की पोल खोल देती है। आसपुर देवसरा ब्लॉक का बेहटा गांव आज "दोहरी मार" झेल रहा है। एक तरफ जर्जर सड़कें ग्रामीणों के पैरों को लहूलुहान कर रही हैं, तो दूसरी तरफ 'जल जीवन मिशन' की कछुआ चाल ने शुद्ध पेयजल के सपने को बोरिंग तक ही सीमित कर दिया है।

सड़क या गिट्टियों का ढेर? पहचानना मुश्किल

​गांव को नहर की पटरी से जोड़ने वाली दो मुख्य पक्की सड़कें अपनी पहचान खो चुकी हैं। सालों से मरम्मत न होने के कारण डामर गायब है और पूरी सड़क नुकीली गिट्टियों में तब्दील हो गई है। हालत यह है कि:

  • सड़क और चकमार्ग में अंतर खत्म: पक्की सड़क अब कच्चे रास्ते जैसी दिखती है।
  • चोटिल हो रहे ग्रामीण: खड़ंजों की ईंटें मिट्टी में धंस चुकी हैं। पैदल चलने वालों के नाखून उखड़ रहे हैं और बोझ लेकर चलने वाले किसान आए दिन मोच का शिकार हो रहे हैं।
  • 10 साल का इंतजार: ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले एक दशक से मरम्मत की मांग की जा रही है, लेकिन प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही।

जल जीवन मिशन: दो साल, सिर्फ एक बोरिंग!

​प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट 'जल जीवन मिशन' का हाल इस गांव में सबसे बुरा है। दो साल पहले शुद्ध पानी का वादा कर टंकी निर्माण शुरू हुआ था, जो आज भी सिर्फ बोरिंग तक ही पहुंच पाया है। पाइपलाइन बिछाने और घर-घर जल पहुंचाने का काम फाइलों में दबा है, जबकि ग्रामीण आज भी पुराने हैंडपंपों के भरोसे दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।

शौचालयों पर जड़ा 'भ्रष्टाचार का ताला'

​गांव में बने सामुदायिक और दिव्यांग शौचालयों की स्थिति हास्यास्पद और दुखद दोनों है। लाखों की लागत से बने इन शौचालयों का लाभ किसी को नहीं मिल रहा:

  • ताले पर ही कर दिया पेंट: लापरवाही का आलम यह है कि दरवाजे पर पेंट करते समय ताला तक नहीं खोला गया, ताले समेत ही पेंट कर दिया गया।
  • पानी का अकाल: शौचालयों में पानी का कोई इंतजाम नहीं है, जिसके कारण इनमें हमेशा ताला बंद रहता है।
  • "सफाईकर्मी सिर्फ स्कूल तक आता है, गांव की गलियां गंदगी से पटी पड़ी हैं। हम सिर्फ कागजों पर स्वच्छ भारत और डिजिटल इंडिया देख रहे हैं, जमीन पर तो सिर्फ मुसीबतें हैं।"ग्रामीणों का सामूहिक स्वर


    प्रशासनिक मौन पर सवाल

    ​बेहटा गांव की यह स्थिति स्थानीय प्रशासन और ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। आखिर क्यों बजट होने के बावजूद सड़कों की मरम्मत नहीं हो रही? और जल जीवन मिशन जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में इतनी देरी का जिम्मेदार कौन है?