आसपुर देवसरा (प्रतापगढ़): उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण विकास के लिए पानी की तरह पैसा बहा रही है, लेकिन प्रतापगढ़ जिले के आसपुर देवसरा ब्लॉक अंतर्गत कोपा ग्रामसभा की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। यहाँ विकास की योजनाएं फाइलों में तो दौड़ रही हैं, लेकिन धरातल पर केवल अव्यवस्था और भ्रष्टाचार का बोलबाला है।
पंचायत भवन बना सफेद हाथी, सामुदायिक शौचालय बदहाल
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्रामसभा का पंचायत भवन अक्सर ताले में कैद रहता है, जिससे जनता को अपने जरूरी कार्यों के लिए दर-दर भटकना पड़ता है। वहीं, लाखों की लागत से बना सामुदायिक शौचालय शो पीस बनकर रह गया है।
- पानी का अभाव: टंकी में बूंद भर पानी नहीं है।
- रास्ता गायब: शौचालय तक पहुँचने के लिए सुगम मार्ग तक नहीं है।
- केयर टेकर की मौज: साफ-सफाई नदारद है, लेकिन केयर टेकर बिना काम किए मानदेय का लाभ ले रहे हैं।
कूड़ा घर का तमाशा: कूड़ा गाड़ी से 'प्रधान जी' ढो रहे अपना सामान!
गाँव को स्वच्छ बनाने के लिए बनाया गया कूड़ा घर खुद अपनी बदहाली पर रो रहा है। आज तक यहाँ कूड़ा नहीं पहुँचा, बल्कि आस-पास झाड़ियों और गंदगी का अंबार लगा है।
गंभीर आरोप: ग्रामीणों ने सीधा आरोप लगाया है कि सरकार द्वारा दी गई कूड़ा गाड़ी का उपयोग सार्वजनिक स्वच्छता के बजाय ग्राम प्रधान अपने निजी कार्यों के लिए कर रहे हैं।
साथ ही, कूड़ा घर के पास स्थित हैंडपंप भी खराब पड़ा है, जिससे पानी निकालने के लिए ग्रामीणों को भारी मशक्कत करनी पड़ती है।
मनरेगा मजदूरों का फूटा गुस्सा
गाँव के मनरेगा मजदूरों का दर्द भी छलक पड़ा है। मजदूरों का कहना है कि उन्हें पिछले 3 वर्षों से कोई काम नहीं मिला है, जबकि कागजों पर विकास कार्य जारी हैं।
प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल
कोपा ग्रामसभा की यह स्थिति ब्लॉक प्रशासन और जिला पंचायत राज अधिकारी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। आखिर किसकी शह पर प्रधान और सचिव सरकारी धन का बंदरबांट कर रहे हैं?
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