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प्रतापगढ़: कान्हा गौशाला में बदहाली की तस्वीरें वायरल, मृत गोवंश देख भड़के ग्रामीण, करोड़ों के बजट पर उठे सवाल,जिम्मेदार कौन?

प्रतापगढ़/पट्टी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता वाली 'कान्हा गौशाला योजना' एक बार फिर भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के आरोपों के घेरे में है। नगर पंचायत पट्टी की ग्रामसभा परसनी के रत्तूपुर स्थित कान्हा गौशाला की विचलित कर देने वाली तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।

क्या है मामला?

​वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों में गौशाला परिसर के भीतर मृत गोवंश पड़े दिखाई दे रहे हैं। वहीं, जीवित गोवंश भी अत्यंत कमजोर और बीमार अवस्था में तड़पते हुए नजर आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि गौशाला में न तो चारे की उचित व्यवस्था है, न ही साफ पानी और इलाज की। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में गोवंश दम तोड़ रहे हैं।

करोड़ों का बजट, फिर भी बदहाल व्यवस्था

​कुम्हिया निवासी शिकायतकर्ता शिवम सिंह ने इस मामले को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही करार दिया है। उन्होंने सवाल खड़ा किया है कि जब गौशाला के निर्माण, संचालन और देखरेख के नाम पर शासन से करोड़ों रुपये का बजट आवंटित किया गया है, तो धरातल पर स्थिति इतनी भयावह क्यों है?

​ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं, बल्कि सरकारी धन की बर्बादी और मूक पशुओं के प्रति क्रूरता का ज्वलंत उदाहरण है।

जांच और कार्रवाई की मांग

​शिवम सिंह समेत परसनी के ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन से इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। ग्रामीणों ने प्रशासन से निम्नलिखित बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है:

  • ​गौशाला निर्माण से लेकर अब तक खर्च हुई पूरी धनराशि का सार्वजनिक विवरण।
  • ​लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और संबंधित एजेंसी पर कठोर कार्रवाई।

अधिकारियों का पक्ष

​इस मामले पर जब हमने नगर पंचायत पट्टी के अधिकारियों से संपर्क किया, तो उन्होंने प्रतिक्रिया दी:

  • अधिशासी अधिकारी (EO) रोबिन सिंह: "वायरल वीडियो के माध्यम से मामला संज्ञान में आया है। पूरे प्रकरण की गहन जांच कराई जाएगी।"
  • नगर पंचायत अध्यक्ष अशोक जायसवाल: "मंगलवार सुबह सोशल मीडिया से जानकारी मिलने पर तत्काल केयरटेकर और संबंधित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त विधिक कार्यवाही की जाएगी।"

नोट: वायरल वीडियो की सत्यता की पुष्टि 'प्रतापगढ़ टुडे' नहीं करता है, लेकिन ग्रामीणों की पीड़ा और वायरल तस्वीरों ने व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न जरूर लगा दिया है।

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