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​प्रतापगढ़: सीएचसी में मरीज से अवैध वसूली पर बड़ी कार्रवाई; डॉक्टर को 'कारण बताओ' नोटिस, आधा वेतन रोका

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), पट्टी में भ्रष्टाचार और मरीज के शोषण का एक गंभीर मामला सामने आया है। शासन ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए दोषी चिकित्सक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

​मुख्य घटनाक्रम

​ग्राम उपाध्यायपुर निवासी श्री अजीत कुमार मिश्रा ने शिकायत दर्ज कराई थी कि 8 अप्रैल 2026 को वे अपने पिता श्री दया शंकर मिश्रा (जिन्हें पैर में दर्द और सांस लेने में तकलीफ थी) के उपचार के लिए सीएचसी पट्टी गए थे।

​शिकायत के अनुसार, वहां तैनात डॉ. अखिलेश जायसवाल ने अस्पताल की सुविधाओं का उपयोग करने के बजाय बाहरी व्यक्तियों को बुलाकर अपने कक्ष में ही रक्त का नमूना (Blood Sample) लिया और जांच बाहर भेज दी। इसके बाद उन बाहरी व्यक्तियों ने जांच के नाम पर ₹2000 की मांग की, जो सरकारी संस्थान में पूरी तरह अवैध है। आरोप है कि जब शिकायतकर्ता ने इस घटना का वीडियो बनाने का प्रयास किया, तो चिकित्सक द्वारा उनके साथ दुर्व्यवहार भी किया गया।

​शासन द्वारा की गई सख्त कार्रवाई

​अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, श्री अमित कुमार घोष ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल निम्नलिखित आदेश जारी किए हैं:

  • वेतन पर रोक: संबंधित चिकित्सक (डॉ. अखिलेश जायसवाल) का आधा वेतन अग्रिम आदेशों तक तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है।
  • कारण बताओ नोटिस: चिकित्सक को 'कारण बताओ' (Show Cause) नोटिस जारी कर दो दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
  • जांच कमेटी का गठन: मामले की विस्तृत जांच के लिए दो सदस्यीय टीम गठित की गई है, जिसमें अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. ए.एन. राय और उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. श्याम भार्गव शामिल हैं।
  • 24 घंटे की डेडलाइन: मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) प्रतापगढ़ को 24 घंटे के भीतर इस पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

​"मरीजों का शोषण बर्दाश्त नहीं"

​अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि:

  1. ​सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों के साथ शिष्ट और संवेदनशील व्यवहार सुनिश्चित किया जाए।
  2. ​किसी भी स्तर पर मरीजों से अवैध शुल्क या अनुचित मांग न की जाए।
  3. ​जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कठोरतम अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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