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यूपी पंचायत चुनाव: क्या इन 3 कारणों से टल जाएगी वोटिंग? मंत्री ओपी राजभर ने दिया बड़ा अपडेट

 उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में इन दिनों चुनावी सरगर्मी तेज है। चाय की दुकानों से लेकर चौपालों तक बस एक ही सवाल है— पंचायत चुनाव कब होंगे? पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे थे कि चुनाव आगे बढ़ सकते हैं। हालांकि, प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने इन अटकलों पर विराम लगाते हुए स्थिति स्पष्ट कर दी है।

इन 3 कारणों से उड़ रही हैं चुनाव टलने की अफवाहें

​सोशल मीडिया पर चुनाव में देरी को लेकर मुख्य रूप से तीन तर्क दिए जा रहे हैं, जिन्होंने वोटरों और भावी उम्मीदवारों की धड़कनें बढ़ा दी हैं:

  1. प्रशासनिक गतिरोध: प्रयागराज में शंकराचार्य और प्रशासन के बीच हुए हालिया विवाद के बाद अधिकारियों के बीच उपजी नाराजगी और इस्तीफे की खबरों ने सरकारी मशीनरी पर दबाव बनाया है। माना जा रहा है कि इससे चुनावी तैयारियों की रफ्तार सुस्त पड़ी है।
  2. UGC नियमों पर नाराजगी: यूजीसी (UGC) के नए नियमों को लेकर 'अपर कास्ट' वोटरों में दिख रही नाराजगी सरकार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। चर्चा है कि सरकार इस असंतोष के बीच चुनाव का जोखिम लेने से कतरा रही है।
  3. तैयारियों का अभाव: फरवरी का महीना शुरू होने को है, लेकिन अभी तक धरातल पर वैसी प्रशासनिक सक्रियता नहीं दिख रही है जैसी अमूमन पंचायत चुनाव से दो-तीन महीने पहले नजर आती है।

मंत्री ओम प्रकाश राजभर का दोटूक जवाब

​तमाम अफवाहों के बीच पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने साफ किया है कि चुनाव टलने का कोई इरादा नहीं है। राजभर के मुताबिक:

  • ​उन्होंने खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस विषय पर विस्तार से चर्चा की है।
  • ​वर्तमान में अधिकारी और कर्मचारी SIR (सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट) जैसे कुछ अनिवार्य कार्यों में व्यस्त हैं।
  • ​जैसे ही ये कार्य संपन्न होंगे, चुनाव प्रक्रिया में तेजी आएगी।
  • ​मंत्री ने संकेत दिए हैं कि अप्रैल से जुलाई के बीच चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने की पूरी उम्मीद है।
  • ​"मीडिया में बनाया जा रहा माहौल निराधार है। चुनाव अपने तय समय पर ही होंगे, बस अधिकारियों के खाली होने का इंतजार है।" - ओपी राजभर, पंचायती राज मंत्री


    आरक्षण की सूची पर टिकी सबकी निगाहें

    ​पंचायत चुनाव की घोषणा से ज्यादा इंतजार आरक्षण सूची (Reservation List) का है। यही वह सूची है जो तय करेगी कि कौन सी सीट SC-ST या OBC के लिए आरक्षित होगी और कहाँ सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार लड़ पाएंगे।

    • पुराने धुरंधर Vs नए चेहरे: कई सीटों पर पुराने प्रधानों की साख दांव पर है, तो कई जगहों पर नए चेहरे आरक्षण सूची के इंतजार में अपनी दावेदारी पक्की कर रहे हैं।
    • जमीनी स्तर पर सक्रियता: भले ही सरकारी मशीनरी शांत दिखे, लेकिन बीजेपी, सपा, कांग्रेस और बसपा जैसे दल अंदरखाने तैयारियों में जुटे हैं। गांवों में बैठकों और खर्चों का हिसाब-किताब अभी से शुरू हो गया है।
    • फिलहाल गेंद सरकार और निर्वाचन आयोग के पाले में है। हालांकि मंत्री के बयान ने यह साफ कर दिया है कि चुनावी बिगुल कभी भी बज सकता है।

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