पट्टी, प्रतापगढ़।
पट्टी तहसील क्षेत्र के अन्नदाता इस समय यूरिया खाद की भीषण किल्लत से जूझ रहे हैं, जिसने उनकी मुश्किलों को कई गुना बढ़ा दिया है। गेहूं और सरसों की फसलों के लिए यह समय खाद डालने का सबसे crucial है, लेकिन सरकारी वितरण प्रणाली पूरी तरह से ध्वस्त नजर आ रही है। सहकारी समितियों पर स्टॉक खत्म होने के कारण किसान कड़ाके की ठंड में भी यूरिया के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
निजी दुकानों पर मनमानी वसूली और कालाबाजारी
समितियों पर खाद न मिलने का सीधा फायदा निजी दुकानदारों को मिल रहा है, जो खुलेआम मनमानी वसूली और कालाबाजारी कर रहे हैं। उड़ैयाडीह, दयालगंज, सैफाबाद, मगरौरा, नारंगपुर, आसपुर देवसरा, ढकवा, गौरामाफी और अमरगढ़ सहित क्षेत्र के प्रमुख बाजारों में दुकानदारों ने यूरिया का कृत्रिम भंडारण कर लिया है।
किसानों का आरोप है कि उन्हें शर्तों के साथ यूरिया दी जा रही है। दुकानदार तब तक यूरिया नहीं देते, जब तक किसान उसके साथ कोई अन्य खाद या कृषि उत्पाद खरीदने को तैयार न हो जाए।
लागत ₹500 तक बढ़ी, किसानों की कमर टूटी
सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि यूरिया के सरकारी मूल्य की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बाजार में यूरिया के दाम तय नहीं हैं; कहीं ₹400 तो कहीं ₹500 तक प्रति बोरी वसूली की जा रही है।
किसान अरुण कुमार पांडे, नीरज पांडे, शिवांश सिंह, शैलेंद्र कुमार, सुनील सिंह, भागवत तिवारी, दिनेश पाण्डेय, राजेंद्र प्रसाद वर्मा, रामखेलावन वर्मा, सीताराम यादव, अमित पाल, राजा पाल, पप्पू पाल और शाहिद सहित कई किसानों ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि पहले ही बीज, डीजल और दवाओं के दाम आसमान छू रहे हैं, ऐसे में महंगी यूरिया ने उनकी कमर तोड़ दी है। दुकानदार अपनी मनमर्जी चला रहे हैं और किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए मजबूर होकर ये महंगे दाम चुका रहे हैं।
💬 किसान अरुण कुमार पांडे ने बताया, "फसल को इस समय यूरिया की सख्त जरूरत है, लेकिन सरकारी दुकान पर खाद नहीं है। प्राइवेट दुकानदार ₹500 मांग रहा है और साथ में जिंक खरीदने को कह रहा है। हम कहां जाएं?"
प्रशासनिक निगरानी का अभाव
खेती का मुख्य सीजन चलने के बावजूद, प्रशासनिक निगरानी का घोर अभाव देखने को मिल रहा है। स्थानीय प्रशासन की ढिलाई के कारण कालाबाजारी करने वाले तत्वों के हौसले बुलंद हैं। किसानों का स्पष्ट आरोप है कि प्रशासन की चुप्पी ही इस अवैध वसूली को बढ़ावा दे रही है।
किसानों की सख्त मांग
त्रस्त किसानों ने जिला प्रशासन और कृषि विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
- तत्काल आपूर्ति: सहकारी समितियों पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया की आपूर्ति तुरंत सुनिश्चित की जाए।
- सख्त कार्रवाई: निजी दुकानों पर हो रही अवैध वसूली और कालाबाजारी पर तुरंत और सख्त कार्रवाई की जाए।
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो उनकी फसलें बर्बाद हो जाएंगी और वे बड़े आंदोलन के लिए विवश होंगे।
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