उत्तर प्रदेश सरकार की 'आदर्श ग्राम' और 'कायाकल्प' योजना को प्रतापगढ़ जिले के आसपुर देवसरा ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली दियावां ग्राम सभा में खुलेआम ठेंगा दिखाया जा रहा है। यहाँ की जमीनी हकीकत सरकारी दावों से बिल्कुल उलट है। चमचमाती दीवारें और रंग-रोगन केवल बाहरी दिखावा साबित हो रहे हैं, जबकि असलियत में ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं के अभाव में नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।
ग्राम सचिवालय: करोड़ों का बजट डकार गए भ्रष्टाचार के 'चूहे'?
दियावां का ग्राम सचिवालय भ्रष्टाचार की जीती-जागती मिसाल बन गया है। सचिवालय की बाहरी दीवारों पर टाइल्स और पेंटिंग तो चकाचक है, लेकिन अंदर का नजारा डरावना है। करोड़ों खर्च होने के बावजूद:
- सचिवालय में न दरवाजे हैं और न ही खिड़कियां।
- अंदर बैठने के लिए न कुर्सी है और न ही मेज।
- हैरानी की बात यह है कि सचिवालय तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों के पास कोई पहुंच मार्ग (रास्ता) तक नहीं है।
आरोग्य मंदिर या घास का मैदान?
ब्लॉक क्षेत्र के ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवा देने के लिए बना आयुष्मान आरोग्य मंदिर खुद अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। यह केंद्र अक्सर ताले में बंद रहता है। अस्पताल परिसर में दवाओं और डॉक्टरों के बजाय बड़ी-बड़ी घास और झाड़ियों का कब्जा है। इलाज के लिए ग्रामीणों को मीलों दूर भटकना पड़ता है।
सरोवर की जमीनी हकीकत
जल संरक्षण के नाम पर भारी अनियमितता बरती गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि खुदाई के बजाय केवल किनारों को बनाकर खानापूर्ति की गई है। तालाब आज भी सूखा पड़ा है।
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