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नगर पंचायत ढकवा में टेंडर प्रक्रिया पर संकट: विज्ञापन के बावजूद नहीं मिले निविदा प्रपत्र, दिनभर भटकते रहे ठेकेदार

प्रतापगढ़। नगर पंचायत ढकवा में सोमवार को निविदा प्रपत्र (टेंडर फॉर्म) की बिक्री को लेकर भारी अव्यवस्था देखने को मिली। समाचार पत्रों में प्रकाशित सूचना के बावजूद कार्यालय से जिम्मेदार अधिकारियों के नदारद रहने के कारण ठेकेदारों को खाली हाथ लौटना पड़ा।

सुबह से शाम तक इंतजार, फिर भी नहीं मिले फॉर्म

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, नगर पंचायत ढकवा द्वारा विभिन्न कार्यों हेतु निविदा आमंत्रित की गई थी, जिसके प्रपत्रों की बिक्री के लिए 19 जनवरी 2026 की तिथि निर्धारित की गई थी। विज्ञापन के अनुसार ठेकेदार सुबह 10:00 बजे ही कार्यालय पहुंच गए थे। हालांकि, सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक इंतजार करने के बाद भी उन्हें निविदा प्रपत्र उपलब्ध नहीं कराए जा सके।

अधिकारी और लिपिक दफ्तर से गायब

​ठेकेदारों का आरोप है कि अधिशासी अधिकारी (EO) और संबंधित लिपिक धर्मेन्द्र कुमार पूरे दिन कार्यालय में उपस्थित नहीं हुए। इस संबंध में जब वहां मौजूद अन्य कर्मचारियों से पूछताछ की गई, तो उन्होंने भी अधिकारियों की अनुपस्थिति पर अनभिज्ञता जाहिर की। कार्यालय सहायक मनोज कुमार और सफाई नायक अभिषेक सिंह सहित अन्य कर्मचारियों ने लिखित रूप में पुष्टि की है कि अधिकारियों के न आने के कारण उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है।

इन फर्मों ने दर्ज कराया विरोध

​निविदा प्रपत्र न मिलने से नाराज आधा दर्जन से अधिक ठेकेदारों ने अधिशासी अधिकारी को संबोधित एक पत्र लिखकर अपना विरोध दर्ज कराया है। विरोध करने वालों में मुख्य रूप से निम्नलिखित फर्म और प्रतिनिधि शामिल रहे:

  • श्री सिद्धि विनायक एंटरप्राइजेज (रामजीत सिंह)
  • एस.पी. एंटरप्राइजेज (विवेक सिंह)
  • प्रवीण सिंह (कैलाश कान्ट्रक्शन)
  • एम्ब्रेल्ड मैनेजमेंट (प्रदीप सिंह)
  • माँ विन्ध्यवासिनी (आदर्श मिश्रा)
  • लक्ष्य एंटरप्राइजेज (जितेन्द्र विक्रम सिंह)
  • आइडियल प्लेसमेंट (विवेक कुमार सिंह)

पारदर्शिता पर उठे सवाल

​ठेकेदारों ने प्रशासन से मांग की है कि निर्धारित तिथि पर फॉर्म उपलब्ध न कराना प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। उन्होंने उच्चाधिकारियों से इस मामले में हस्तक्षेप करने और जल्द से जल्द निविदा प्रपत्र उपलब्ध कराने की अपील की है। समाचार लिखे जाने तक इस मामले में किसी भी वरिष्ठ अधिकारी का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया था।

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